Wednesday, 4 June 2014

ब्रह्म मुहूर्त क्या है ? इसका वैज्ञानिक लाभ क्या है ?



ब्रह्म मुहूर्त का ही विशेष महत्व क्यों 

रात्रि के अंतिम प्रहर को ब्रह्म मुहूर्त कहते हैं। हमारे ऋषि मुनियों ने इस मुहूर्त का विशेष महत्व बताया है। उनके अनुसार यह समय निद्रा त्याग के लिए सर्वोत्तम है। ब्रह्म मुहूर्त में उठने से सौंदर्य, बल, विद्या, बुद्धि और स्वास्थ्य की प्राप्ति होती है। सूर्योदय से चार घड़ी (लगभग डेढ़ घण्टे) पूर्व ब्रह्म मुहूर्त में ही जग जाना चाहिये। इस समय सोना शास्त्र निषिद्ध है।

ब्रह्ममुहूर्ते या निद्रा सा पुण्यक्षयकारिणी
(ब्रह्ममुहूर्त की पुण्य का नाश करने वाली होती है।)

ब्रह्म मुहूर्त का विशेष महत्व बताने के पीछे हमारे विद्वानों की वैज्ञानिक सोच निहित थी। वैज्ञानिक शोधों से ज्ञात हुआ है कि ब्रह्म मुहुर्त में वायु मंडल प्रदूषण रहित होता है। इसी समय वायु मंडल में ऑक्सीजन (प्राण वायु) की मात्रा सबसे अधिक (41 प्रतिशत) होती है, जो फेफड़ों की शुद्धि के लिए महत्वपूर्ण होती है। शुद्ध वायु मिलने से मन, मस्तिष्क भी स्वस्थ रहता है।

आयुर्वेद के अनुसार ब्रह्म मुहूर्त में उठकर टहलने से शरीर में संजीवनी शक्ति का संचार होता है। यही कारण है कि इस समय बहने वाली वायु को अमृततुल्य कहा गया है। इसके अलावा यह समय अध्ययन के लिए भी सर्वोत्तम बताया गया है क्योंकि रात को आराम करने के बाद सुबह जब हम उठते हैं तो शरीर तथा मस्तिष्क में भी स्फूर्ति व ताजगी बनी रहती है। प्रमुख मंदिरों के पट भी ब्रह्म मुहूर्त में खोल दिए जाते हैं तथा भगवान का श्रृंगार व पूजन भी ब्रह्म मुहूर्त में किए जाने का विधान है।

ब्रह्ममुहूर्त के धार्मिक, पौराणिक व व्यावहारिक पहलुओं और लाभ को जानकर हर रोज इस शुभ घड़ी में जागना शुरू करें तो बेहतर नतीजे मिलेंगे।

आइये जाने ब्रह्ममुहूर्त का सही वक्त व खास फायदे

धार्मिक महत्व - व्यावहारिक रूप से यह समय सुबह सूर्योदय से पहले चार या पांच बजे के बीच माना जाता है। किंतु शास्त्रों में साफ बताया गया है कि रात के आखिरी प्रहर का तीसरा हिस्सा या चार घड़ी तड़के ही ब्रह्ममुहूर्त होता है। मान्यता है कि इस वक्त जागकर इष्ट या भगवान की पूजा, ध्यान और पवित्र कर्म करना बहुत शुभ होता है। क्योंकि इस समय ज्ञान, विवेक, शांति, ताजगी, निरोग और सुंदर शरीर, सुख और ऊर्जा के रूप में ईश्वर कृपा बरसाते हैं। भगवान के स्मरण के बाद दही, घी, आईना, सफेद सरसों, बैल, फूलमाला के दर्शन भी इस काल में बहुत पुण्य देते हैं।

पौराणिक महत्व - वाल्मीकि रामायण के मुताबिक माता सीता को ढूंढते हुए श्रीहनुमान ब्रह्ममुहूर्त में ही अशोक वाटिका पहुंचे। जहां उन्होंने वेद व यज्ञ के ज्ञाताओं के मंत्र उच्चारण की आवाज सुनी।

व्यावहारिक महत्व - व्यावहारिक रूप से अच्छी सेहत, ताजगी और ऊर्जा पाने के लिए ब्रह्ममुहूर्त बेहतर समय है। क्योंकि रात की नींद के बाद पिछले दिन की शारीरिक और मानसिक थकान उतर जाने पर दिमाग शांत और स्थिर रहता है। वातावरण और हवा भी स्वच्छ होती है। ऐसे में देव उपासना, ध्यान, योग, पूजा तन, मन और बुद्धि को पुष्ट करते हैं।

इस तरह युवा पीढ़ी शौक-मौज या आलस्य के कारण देर तक सोने के बजाय इस खास वक्त का फायदा उठाकर बेहतर सेहत, सुख, शांति और नतीजों को पा सकती हैं

Tuesday, 3 June 2014

'प्रियंका ने संभाली कमान तो और हो जाएगा बेड़ा गर्क'

कम नहीं हुए बागी तेवर


कम नहीं हुए बागी तेवर
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस द्वारा पार्टी से निलंबित किए जाने के बाद भी विधायक भंवरलाल शर्मा के तेवर कम नहीं हुए हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बाद अब उन्होंने प्रियंका गांधी पर निशाना साधा है। 

उन्होंने कहा कि राहुल के विफल होने के बाद अब पार्टी ने परिवारवाद के चलते प्रियंका गांधी को आगे किया तो पार्टी का और भी बेड़ा गर्क हो जाएगा।


अब प्रियंका के नाम पर भी व‌िरोध
शर्मा ने कहा कि पार्टी को ध्यान रखना होगा कि प्रियंका गांधी के नाम के पीछे वाड्रा भी जुड़ा है, लेकिन परिवारवाद के आगे पार्टी की कोई सोच ही नहीं है। उन्होंने कहा कि सोनिया-राहुल के नजदीकी चापलूस नेताओं की राय है कि प्रियंका को आगे लाया जाए। 

उन्होंने कहा कि मां-बेटे को घेरे रखने वाले ये नेता अपनी फितरत नहीं छोड़ रहे और अब प्रियंका को आजमाने की बात कर रहे हैं। प्रियंका के आने से व्यवस्थाएं नहीं बदलेंगी, परिवारवाद तो चलता ही रहेगा।


दम होता तो सदन में पार्टी के नेता होते राहुल

दम होता तो सदन में पार्टी के नेता होते राहुल
शर्मा ने कहा कि जब कांग्रेस ने भावी प्रधानमंत्री के रूप में राहुल गांधी को प्रोजेक्ट किया था तो अब पार्टी के सदन के नेता भी वही होने चाहिए थे, लेकिन राहुल में दम ही नहीं है। 

दम होता तो सदन में पार्टी के नेता बनाए जाते। राहुल की न कोई नीति है और न ही कोई सोच। पार्टी का भविष्य खतरे में है।




हिन्दू शास्त्र में ईश्वर पूजा के विधान ----



हमारे हिन्दू शास्त्र में ईश्वर पूजा के कुछ खास विधान दिए गए हैं. पथ पूजा तो सब करते हैं परन्तु यदि इन नियमों को ध्यान में रखा जाये तो उसी पूजा पथ का हम अत्यधिक फल प्राप्त कर सकते हैं.वे नियम कुछ इस प्रकार हैं.

1 सूर्य, गणेश,दुर्गा,शिव एवं विष्णु ये पांच देव कहलाते हैं. इनकी पूजा सभी कार्यों में गृहस्थ आश्रम में नित्य होनी चाहिए. इससे धन,लक्ष्मी और सुख प्राप्त होता है.

2 गणेश जी और भैरवजी को तुलसी नहीं चढ़ानी चाहिए.

3 दुर्गा जी को दूर्वा नहीं चढ़ानी चाहिए.

4 सूर्य देव को शंख के जल से अर्घ्य नहीं देना चाहिए.

5 तुलसी का पत्ता बिना स्नान किये नहीं तोडना चाहिए. जो लोग बिना स्नान किये तोड़ते हैं,उनके तुलसी पत्रों को भगवान स्वीकार नहीं करते हैं.

6 रविवार,एकादशी,द्वादशी ,संक्रान्ति तथा संध्या काल में तुलसी नहीं तोड़नी चाहिए

7 दूर्वा( एक प्रकार की घास) रविवार को नहीं तोड़नी चाहिए.

8 केतकी का फूल शंकर जी को नहीं चढ़ाना चाहिए.

९ कमल का फूल पाँच रात्रि तक उसमें जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं.

10 बिल्व पत्र दस रात्रि तक जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं.

11 तुलसी की पत्ती को ग्यारह रात्रि तक जल छिड़क कर चढ़ा सकते हैं.

12 हाथों में रख कर हाथों से फूल नहीं चढ़ाना चाहिए.

13 तांबे के पात्र में चंदन नहीं रखना चाहिए.

14 दीपक से दीपक नहीं जलाना चाहिए जो दीपक से दीपक जलते हैं वो रोगी होते हैं.

15 पतला चंदन देवताओं को नहीं चढ़ाना चाहिए.

16 प्रतिदिन की पूजा में मनोकामना की सफलता के लिए दक्षिणा अवश्य चढ़ानी चाहिए. दक्षिणा में अपने दोष,दुर्गुणों को छोड़ने का संकल्प लें, अवश्य सफलता मिलेगी और मनोकामना पूर्ण होगी.

17 चर्मपात्र या प्लास्टिक पात्र में गंगाजल नहीं रखना चाहिए.

18 स्त्रियों और शूद्रों को शंख नहीं बजाना चाहिए यदि वे बजाते हैं तो लक्ष्मी वहां से चली जाती है.

19 देवी देवताओं का पूजन दिन में पांच बार करना चाहिए. सुबह 5 से 6 बजे तक ब्रह्म बेला में प्रथम पूजन और आरती होनी चाहिए. प्रात:9 से 10 बजे तक दिवितीय पूजन और आरती होनी चाहिए,मध्याह्र में तीसरा पूजन और आरती,फिर शयन करा देना चाहिए शाम को चार से पांच बजे तक चौथा पूजन और आरती होना चाहिए,रात्रि में 8 से 9 बजे तक पाँचवाँ पूजन और आरती,फिर शयन करा देना चाहिए.

20 आरती करने वालों को प्रथम चरणों की चार बार,नाभि की दो बार और मुख की एक या तीन बार और समस्त अंगों की सात बार आरती करनी चाहिए

21 पूजा हमेशा पूर्व या उतर की ओर मुँह करके करनी चाहिए, हो सके तो सुबह 6 से 8 बजे के बीच में करें

22 पूजा जमीन पर ऊनी आसन पर बैठकर ही करनी चाहिए, पूजागृह में सुबह एवं शाम को दीपक,एक घी का और एक तेल का रखें.

23 पूजा अर्चना होने के बाद उसी जगह पर खड़े होकर 3 परिक्रमाएँ करें.

24 पूजाघर में मूर्तियाँ 1 ,3 , 5 , 7 , 9 ,11 इंच तक की होनी चाहिए, इससे बड़ी नहीं तथा खड़े हुए गणेश जी,सरस्वतीजी ,लक्ष्मीजी, की मूर्तियाँ घर में नहीं होनी चाहिए.

25 गणेश या देवी की प्रतिमा तीन तीन, शिवलिंग दो,शालिग्राम दो,सूर्य प्रतिमा दो,गोमती चक्र दो की संख्या में कदापि न रखें.अपने मंदिर में सिर्फ प्रतिष्ठित मूर्ति ही रखें उपहार,काँच, लकड़ी एवं फायबर की मूर्तियां न रखें एवं खण्डित, जलीकटी फोटो और टूटा काँच तुरंत हटा दें, यह अमंगलकारक है एवं इनसे विपतियों का आगमन होता है.

26 मंदिर के ऊपर भगवान के वस्त्र, पुस्तकें एवं आभूषण आदि भी न रखें मंदिर में पर्दा अति आवश्यक है अपने पूज्य माता --पिता तथा पित्रों का फोटो मंदिर में कदापि न रखें,उन्हें घर के नैऋत्य कोण में स्थापित करें .

27 विष्णु की चार, गणेश की तीन,सूर्य की सात, दुर्गा की एक एवं शिव की आधी परिक्रमा कर सकते हैं

28 प्रत्येक व्यक्ति को अपने घर में कलश स्थापित करना चाहिए कलश जल से पूर्ण, श्रीफल से युक्त विधिपूर्वक स्थापित करें यदि आपके घर में श्रीफल कलश उग जाता है तो वहाँ सुख एवं समृद्धि के साथ स्वयं लक्ष्मी जी नारायण के साथ निवास करती हैं तुलसी का पूजन भी आवश्यक है

29 मकड़ी के जाले एवं दीमक से घर को सर्वदा बचावें अन्यथा घर में भयंकर हानि हो सकती है

30 घर में झाड़ू कभी खड़ा कर के न रखें झाड़ू लांघना, पाँवसे कुचलना भी दरिद्रता को निमंत्रण देना है दो झाड़ू को भी एक ही स्थान में न रखें इससे शत्रु बढ़ते हैं

31 घर में किसी परिस्थिति में जूठे बर्तन न रखें. क्योंकि शास्त्र कहते हैं कि रात में लक्ष्मीजी घर का निरीक्षण करती हैं यदि जूठे बर्तन रखने ही हो तो किसी बड़े बर्तन में उन बर्तनों को रख कर उनमें पानी भर दें और ऊपर से ढक दें तो दोष निवारण हो जायेगा

32 कपूर का एक छोटा सा टुकड़ा घर में नित्य अवश्य जलाना चाहिए,जिससे वातावरण अधिकाधिक शुद्ध हो: वातावरण में धनात्मक ऊर्जा बढ़े.

33 घर में नित्य घी का दीपक जलावें और सुखी रहें

34 घर में नित्य गोमूत्र युक्त जल से पोंछा लगाने से घर में वास्तुदोष समाप्त होते हैं तथा दुरात्माएँ हावी नहीं होती हैं

35 सेंधा नमक घर में रखने से सुख श्री(लक्ष्मी) की वृद्धि होती है

36 रोज पीपल वृक्ष के स्पर्श से शरीर में रोग प्रतिरोधकता में वृद्धि होती है

37 साबुत धनिया,हल्दी की पांच गांठें,11 कमलगट्टे तथा साबुत नमक एक थैली में रख कर तिजोरी में रखने से बरकत होती है श्री (लक्ष्मी) व समृद्धि बढ़ती है.

38 दक्षिणावर्त शंख जिस घर में होता है,उसमे साक्षात लक्ष्मी एवं शांति का वास होता है वहाँ मंगल ही मंगल होते हैं पूजा स्थान पर दो शंख नहीं होने चाहिएँ.

39 घर में यदा कदा केसर के छींटे देते रहने से वहां धनात्मक ऊर्जा में वृद्धि होती है पतला घोल बनाकर आम्र पत्र अथवा पान के पते की सहायता से केसर के छींटे लगाने चाहिएँ.

40 एक मोती शंख,पाँच गोमती चक्र, तीन हकीक पत्थर,एक ताम्र सिक्का व थोड़ी सी नागकेसर एक थैली में भरकर घर में रखें श्री (लक्ष्मी) की वृद्धि होगी.

41 आचमन करके जूठे हाथ सिर के पृष्ठ भाग में कदापि न पोंछें,इस भाग में अत्यंत महत्वपूर्ण कोशिकाएँ होती हैं.

42 घर में पूजा पाठ व मांगलिक पर्व में सिर पर टोपी व पगड़ी पहननी चाहिए,रुमाल विशेष कर सफेद रुमाल शुभ नहीं माना जाता है.





350 अंग्रेज सेनिको ने भारत में ईस्ट -इण्डिया कंपनी का साम्रज्य स्थापित किया।


1757 में बंगाल के अंदर सिराजु दोला का राज था ,सिराजु दोला के साथ व्यापार करने के लिए ईस्ट इंडिया कंपनी का गवर्नर जनरल रॉबर्ट क्लाइव गया। तब -तक ईस्ट इण्डिया कंपनी भारत में केवल व्यपार करती थी उसका भारत के किसी भी राज्य पर कब्ज़ा या अधिकार नहीं था।

तो जब बंगाल के शासक सिराजु दोला के पास रॉबर्ट कलाइव व्यापार करने गया तो सिराजु दोला ने ईस्ट इण्डिया कंपनी के साथ किसी भी प्रकार का व्यापर करने से साफ़ मना कर दिया। इस पर रॉबर्ट कलाइव भड़क गया और उसने चेतावनी दी की अगर व्यापर करने की अनुमति नहीं दी गई तो वो युद्ध करेगा ,इस चेतावनी को सिराजु दोला ने कबूल किया और युद्ध का प्रस्ताव स्वीकार किया।

इसके बाद जो युद्ध हुआ उसका नाम आपने इतिहास में बहोत बार पढ़ा होगा ,"प्लासी " का युद्ध। सिरजु दोला और गर्वनर जनरल रॉबर्ट क्लाइव ने जहा युद्ध करने का निश्चय किया उसका नाम प्लासी था। लेकिन सचाई यह है की उस वक्त प्लासी में कोई युद्ध हुआ ही नहीं था।

जब प्लासी के मैदान में सिराजु डोला और रॉबर्ट कलाइव की सेनाये आमने -सामने आई तो रॉबर्ट कलाइव चौक गया क्यूंकि क्लाइव के पास 350 सैनिक थे और सिराजु डोला के पास 18 हजार। फिर भी लड़ाई लड़े बिना ही रॉबर्ट कलाइव जीत जाता है। रॉबर्ट कलाइव कूटनीत्ति का प्रयोग करता है और अपने एक दूत को सिराजु डोला की सेना के पास भेजता है दूत के साथ कलाइव एक संदेशा भेजता है ,सिराजु डोला की सेना की अगुवाई "मीर जफ़र " कर रहा था। रोबर्ट कलाइव ,मीर जाफ़र को प्रस्ताव देता है की अगर मीर जाफर उसके सामने युद्ध ना करे और आत्मसर्पण कर दे तो ईस्ट इण्डिया कंपनी जाफर को एक क्विंटल सोने के सिक्के देगी और साथ ही मीर जाफर को बंगाल का नया राजा बना दिया जायेगा। मीर जाफर इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लेता है और ईस्ट इण्डिया कंपनी के 350 सेनिको के सामने मीर जाफर की अगुवाई वाले 18 हजार सैनिक आत्मसमर्पण कर देते है।

इस घटना को खुद रॉबर्ट कलाइव ने अपनी डायरी में लिखा है। रॉबर्ट लिखते है की "आत्मसमर्पण कराने के बाद शान से मै और मेरी सेना मुशिराबाद {तत्कालीन बंगाल की राजधानी ,जहा सिराजु डोला रहता था। } की तरफ बढ़ रहे थे। हमारे पीछे -पीछे मीर जाफर के 18 हजार सैनिक गुलामो की तरह सिर झुकाय चल रहे थे। रास्ते में हजारो लोग तालियों के साथ हमारा स्वागत कर रहे थे लेकिन किसी ने भी पत्थर मार कर हमारा विरोध नहीं किया ,शायद वो गुलाम बनने के लिए तैयार थे। इस तरह हम मुशिराबाद पहुंच जाते है और सिराजु डोला का सर कलम करते है।

उसके बाद कुछ दिनों के लिए मीर जाफर के भतीजे को बंगाल का शासक बना दिया जाता है फिर कुछ दिन बाद मीर जाफर को गद्दी सॉफ दी जाती है। रॉबर्ट क्लाइव षड़यंत्र करके मीर जाफर को मार देता है और खुद बंगाल का शासक बन जाता है

इस तरह सबसे पहली बार ईस्ट इण्डिया कंपनी का भारत के किसी राज्य पर अधिकार हो जाता है उसके बाद कंपनी अपनी ताकत बढाती जाती है। रोबर्ट कलाइव जान चूका था की भारत वाशियो को कैसे हराना है। उसे पता था की भारत के लोग गुलामी स्वीकार करने के लिए तैयार बैठे है।


गोपीनाथ मुंडे का निधन == कुछ सवाल -



ग्रामीण विकास मंत्री और महाराष्ट्र में
भाजपा के ओबीसी चेहरा गोपीनाथ मुंडे का मंगलवार
सुबह सड़क हादसे के बाद हृदय गति रुकने से निधन हो गया।
उन्होंने एम्स के ट्रॉमा सेंटर में सुबह करीब 7.20 बजे
अंतिम सांस ली। भाजपा नेता व कैबिनेट मंत्री नितिन
गडकरी ने उनके मौत की जानकारी दी। कल पैतृक गांव
पर्ली में मुंडे का अंतिम संस्कार किया जाएगा।
पहली बार केंद्र सरकार में कैबिनेट मंत्री बने 64 वर्षीय गोपीनाथ मुंडे मंगलवार सुबह करीब 6 बजे अपने
आवास से मुंबई जाने के लिए एयरपोर्ट निकले थे। रास्ते
में लोधी कॉलोनी के पास पृथ्वीराज रोड और तुगलक रोड
के बीच उनकी एसएक्स 4 कार को एक इंडिका कार ने बगल
से टक्कर मार दी।
मौके पर मौजूद मुंडे के निजी सहायक और ड्राइवर ने
बताया कि मुंडे कार की पिछली सीट पर बैठे थे और जैसे
ही टक्कर लगी वह नीचे गिर गए लेकिन उन्हें
ज्यादा चोटें नहीं आई। उन्होंने पानी मांगकर
पीया और खुद को अस्पताल ले जाने को कहा। करीब 6.30 उन्हें एम्स के ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया।
डॉक्टरों के अनुसार जब मुंडे को अस्पताल
लाया गया उस समय उनकी सांस, रक्तचाप व हृदय
गति रुकी हुई थी। करीब 50 मिनट की अथक कोशिश के बाद
भी उन्हें सामान्य हालत में नहीं लाया जा सका और
डॉक्टरों ने करीब 7.20 बजे उन्हें मृत घोषित कर दिया।

डॉक्टर की मानें तो उन्हें शुगर और ब्लड प्रेशर
की शिकायत थी, जिसके लिए वे कुछ दवाइयां भी ले रहे
थे। हादसे के बाद उन्हें दिल का दौरा पड़ा और
उनकी सांसें थम गई। डॉक्टर ने बताया कि मुंडे के शरीर
पर कोई गंभीर बाहरी चोट के निशान नहीं पाए गए। हम मौत
के बारे कुछ नहीं कह सकते, लेकिन चिकित्सकीय रूप से
ऐसा कहा जा सकता है कि उनकी मौत हृदय गति रुकने से
ही हुई है।

सवाल 
1. मुंडे जी सुबह जिस रोड से एअरपोर्ट 
जा रहे थे वह रोड इतना बिजी नही था ।

2 उनकी कार को पीछे से आकर टक्कर 
मारी गई और ठीक उस और मारी गई 
जिस और वो सो रहे थे ।

3 टक्कर को केवल one साइड को 
फोकस कर मारा गया ऐसा अब तक 
प्रतीत हुआ ।

4 निजी सचिव और ड्राईवर को चोट 
नही वो ही उनको ले कर गये ।

5 वो कार में ही गिरे और इतनी 
भयंकर चोट ।

6.उन्होंने पानी भी पिया और होस्पिटल 
ले जाने को बोला ।

7.ब्रेन इंजुरी अगर होती हैं तो स्पॉट 
कन्सियस नेस लूज होती हैं । ऐसे में 
वर्बल कम्युनिकेशन ??

8.तीन महीने बाद ही महाराष्ट्र में चुनाव 
होने हैं और लोकप्रियता में मुंडे जी 
ऊपर थे ।

9.उन्होंने इन कुछ महीनों में महाराष्ट्र के 
प्रतिनिधित्व की मंशा बार बार 
जाहिर की थी ।