Thursday, 2 October 2014

टेलिपैथी का क्या है सच ?

सपना हुआ संभव


कई बार जब हम किसी से मिलना चाहते हैं या फिर फोन करना चाहते हैं, और तभी उस शख्स से संपर्क हो जाए, तो हम ये कहना नहीं भूलते कि हम दोनों के बीच शायद टेलिपैथीहुई है।

हंसते हुए हम इस बात को भूल जाते हैं। लेकिन, क्या आपको पता था कि इसका अब तक कोई साइंटेफिक बेस नहीं था?

हम ऐसा हमेशा से जानते हैं कि टेलिपैथी हम उस प्रोसीजर को कहते हैं जब बिना कुछ कहे ही हमारी बात सुनने वाली तक पहुंच जाए और वो फौरन रिस्पॉन्ड करे।

मिरर में छपी खबर के मुताबिक सांइस हमेशा से इस बात की जांच करने में लगा हुआ था कि ये चीज कितनी सच है? अब, उन्होंने अपने इस शोध से साबित कर दिया कि टेलिपैथी होती है।


कराया संपर्क

कराया संपर्क

हम बात कर रहें हैं अमेरिका के हावर्ड युनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के एक दल की। इस दल से भारत में बैठे एक आदमी को पेरिस में बैठे एक आदमी से टेलिपैथी के माध्यम से बात करवाया।

जी हां। उन्होंने भारत में बैठे उस शख्स के सिर पर एक सेंस्टिव हेडसेट लगाया और वैसा ही हेडसेट पेरिस में बैठे आदमी को भी। दोनों के बीच 4000 मील की दूरी थी।

दोनों के हेडसेट को इंटरनेट से लिंक कर ये वैज्ञानिक जांच कर रहे थे। उन्होंने देखा कि भारत में बैठे आदमी के मन में हेलो बोलने का ख्याल आया। उसने इतना सोचा ही था कि पेरिस वाले इंसान तक उसकी ये ग्रीटिंग पहुंच गई और उसे महसूस हुआ कि उसे हेलो बोला गया है।

कोई जादू नहीं

पूरा शोध करने वाले जीओ रूफीनी ने कहा कि ये काम एक तकनीकी की वजह से है और इसमें कुछ भी जादुई नहीं। हम लोगों ने टेकनॉलोजी को दिमाग के इल्कट्रोमैगनिक वेव्स से इंट्रैक्ट करवाया।

तब जाकर ये सब संभव हो पाया। और अब, जबकि दुनिया की सबसे पहली टेलिपैथी रिकॉर्ड की जा चुकी है, आप इस प्रोसीजर का वीडियो देख सकते हैं।

हम बता दें कि अब वैज्ञानिक ये भी तलाश रहें हैं कि दूर बैठे इंसान से हम बिना किसी टाइपिंग या फिर बात किए कंवरशन में रह सकते हैं या नहीं?

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