देश में बेशक रामलीलाएं सांप्रदायिक सौहार्द का प्रतीक बनी हुई हों, लेकिन दिल्ली के सुभाष मैदान में रावण दहन कार्यक्रम शीर्ष नेताओं के बीच ‘राजनीतिक सौहार्द’ का गवाह बना।
अक्सर एक दूसरे पर तीखे राजनैतिक बाण चलाने वाले इन नेताओं के बीच यह पहला अवसर था जब प्रधानमंत्री मोदी, पूर्व पीएम मनमोहन सिंह और सोनिया गांधी के बीच हंसीनुमा माहौल में कुछ देर गुफ्तगू हुई।
हालांकि
पिछले साल की तरह इस बार भी कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी सुभाष मैदान नहीं पहुंचे।
श्री धार्मिक लीला कमेटी के इतिहास में पहली बार राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति, प्रधानमंत्री व स्वास्थ्य मंत्री सहित यूपीए अध्यक्ष ने मंच साझा किया।
90 वर्षों से चल रही श्री धार्मिक लीला कमेटी के सुभाष मैदान स्थित रावण दहन के कार्यक्रम में परंपरा रही है कि देश के राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री ही यहां पर मुख्य अतिथि होते रहे है।
रामलीला
मैदान में आयोजित हुई श्री रामलीला कमेटी की रामलीला में कांग्रेस के नेता तो लाल किले में लवकुश रामलीला कमेटी की रामलीला में भाजपा नेता मुख्य आयोजनकर्ताओं में रहे हैं।
कार्यक्रम से पूर्व राष्ट्रपति के इंतजार में गेट पर खड़े होकर भाजपा व कांग्रेस के ये शीर्ष नेता हंसते मुस्कुराते हुए गुफ्तगू करते दिखे।
इससे पहले 11 वर्ष पहले भी ऐसा ही माहौल था जब भाजपा के प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी और सोनिया गांधी रामलीला के इसी मंच पर साथ थे लेकिन उनके बीच अभिवादन के अलावा कोई चर्चा नहीं हुई।
पिछले
11 वर्षों में एक बात और नई थी कि प्रधानमंत्री दिल्ली में सिर्फ एक ही रावण दहन के कार्यक्रम में शामिल हुए।
बहरहाल
कांग्रेस नेता के रूप में राहुल गांधी यहां सबसे पहले पहुंचे जबकि वह इस बार सुभाष मैदान नहीं गए। इसके बाद सोनिया गांधी व मनमोहन भी वहां पहुंचे।
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