Saturday, 4 October 2014

डेंगू के मच्छरों को फैलने से रोकेगा यह तरीका

डेंगू के मच्छरों को संक्रमित करेंगे ये मच्छर

ब्राज़ील के वैज्ञानिकों ने रियो डी जेनेरो में हज़ारों ऐसे मच्छरों को छोड़ा है, जो डेंगू को रोकने में सहायक वूल्बाचिया बैक्टीरिया से संक्रमित हैं।

कोशिकाओं में पाए जाने वाला वूल्बाचिया इंसानों को संक्रमित नहीं करता है। वैज्ञानिकों का मानना है कि प्रजनन से ऐसे मच्छरों की संख्या बढेगी, जो डेंगू के मामलों को कम करेगी।

यह पहल ऑस्ट्रेलिया, वियतनाम और इंडोनेशिया में चलाई जा रही परियोजना का हिस्सा है।



ब्राज़ील के शोध संस्थान फ़िओक्रूज़ के वैज्ञानिक और ब्राज़ील में इस अभियान के प्रमुख लुसियानो मोरेइरा ने बताया कि यह परियोजना 2012 में शुरू की गई।


उन्होंने कहा, ''हमारी टीमें रियो के आसपास के चार प्रभावित इलाक़ों का हफ़्ते में एक बार दौरा करती थीं। एक विशेष जाल में मच्छरों को पकड़कर उनका विश्लेषण किया जाता था।''

उन्होंने बताया कि चार महीनों तक हर महीने 10 हज़ार मच्छर छोड़े जाएंगे। रियो के उत्तर में स्थित ट्यूबिकांगा से इसकी शुरूआत होगी।

वूल्बाचिया नाम का यह बैक्टीरिया 60 फ़ीसद कीट-पतंगों में पाया जाता है। यह डेंगू फैलाने वाले एडीज एजिप्टी नाम के मच्छर के लिए टीके की तरह काम करता है। यह उसके शरीर में डेंगू विषाणु के और बनने पर रोक लगाता है।

ऑस्ट्रेलिया में औसतन 10 हफ़्ते में ऐसे मच्छर छोड़े जाते हैं। वूल्बाचिया पर अध्ययन सबसे पहले 2008 में ऑस्ट्रेलिया के यूनिवर्सिटी ऑफ़ मोनाश में शुरू हुआ था।

ब्राज़ील में 20 साल तक शांत रहने के बाद डेंगू 1981 में उभर आया था। पिछले 30 साल में इसके 70 लाख मामले सामने आए हैं।



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