Saturday, 4 October 2014

पैरों में दुर्गन्ध : कैसे मुक्ति पायें ?

Foot odour

पैरों की दुर्गन्ध क्या है

Foot odour
पैरों में तथा शरीर के अन्य भागों में दुर्गन्ध की समस्या जिसे मेडिकल भाषा में Bromhidrosis कहते हैं; ये जिसे हो जाती है तो उसके साथ साथ उसके आस पास रहने वालों को भी बदबू से परेशानी उठानी पड़ती है. ये एक ऐसी समस्या है जिससे व्यक्ति को सामाजिक रूप से हँसी का भी पात्र बनना पड़ता है. हमारे शरीर की २०-३० लाख पसीने की ग्रंथियों में से लगभग लाख ग्रंथियां सिर्फ पैरों में ही होती हैं.

पैरों में दुर्गंध का कारण

foot odour cause

foot odour cause

.दरअसल आपके पैरों का पसीना दुर्गन्ध का कारण नहीं होता है बल्कि इसके नम वातावरण में उपस्थित हानिकारक Bacteria और पैरों की मृत कोशिकाएं यह दुर्गन्ध पैदा करते हैं.

.जब पैरों में पसीना बनता है और किसी कारण से यह वाष्पीकृत नहीं हो पाता (जैसे- मोज़े पहनना) तो यह कोशिकाओं को मार देता है और ये पैरों की त्वचा पर संख्या में बढने लगती हैं. कुछ समय बाद पैरों की मृत कोशिकाओं से दुर्गन्ध आने लगती है; यही मृत कोशिकाएं जब संख्या में बहुत अधिक हो जाती हैं तो इनसे इतनी दुर्गन्ध आने लगती है कि आसपास बैठे हुए लोगों को भी परेशानी होने लगती है और व्यक्ति के पास बैठने से भी लोग कतराने लगते हैं.

.जो लोग ऐसे जूते पहनते हैं जिसमें हवा के बहाव के लिए उचित व्यवस्था नहीं होती, सिंथेटिक पदार्थों (प्लास्टिक, नायलोन, पोलिस्टर) से बने जूते अधिक पहनते हैं उनके पैरों में दुर्गन्ध आने के ज्यादा चांस होते हैं.

क्या खाएं-

भोजन में जिंक के स्रोतों को शामिल करें जैसे पालक, बीन्स, मशरुम आदि।

क्या नहीं खाएं-

अगर आपको पैरों में दुर्गन्ध आने की समस्या है तो तेज गंध वाली चीज़ें जैसे लहसुन, प्याज, मिर्च आदि खाएं. इनको खाने से इनकी तेज गंध खून में मिलकर आपके पसीने में भी इकट्ठी हो सकती है; जिससे आपकी परेशानी और बढ़ सकती है.

पैरों की दुर्गन्ध का आसान इलाज

foot odour treatment

foot odour treatment

.पैरों में Baking soda के पावडर का प्रयोग अनेक रोगियों को लाभ पहुंचा चुका है. यह पैरों के आसपास क्षारीय वातावरण बना देता है जिससे bacteria मर जाते हैं और बदबू नहीं आती है.

.अदरक नींबू को छोटे छोटे टुकड़ों में काट लें और इसका पेस्ट बनाएँ, फिर इसे पैरों पर लगाकर, हल्के हाथों से १० मिनट मसाज करें और फिर धो लें। ऐसा हफ्ते में तीन बार करें.

.एक टब गुनगुने पानी में - चम्मच नमक डालकर पैरों को आधे घंटे तक इस पानी में रखें। पैरों को बाहर निकालने के बाद एकदम से नहीं पोंछे बल्कि अपने आप सूखने दें. उसके बाद मोजे पहनें. नमक का पानी त्वचा को सूखा बनाता है और पसीना आने से रोकता है.

.फिटकरी इस समस्या के समाधान में बहुत लाभकारी है.एक चम्मच फिटकरी को एक कप गुन्गुने पानी में मिलाएं. इस द्रव से पैरों को धोकर १५-२० मिनट तक ऐसे ही रहने दें. फिर इस पर फिटकरी का बारीक पिसा हुआ पावडर डालकर जूते पहन लें.

 भविष्य में ये हो इसके लिए क्या करें-

Foot odour prevention

.दिन में बार जूतों और धुले हुए पैरों के तलवों में टेलकम पाउडर डालें. इससे पैरों से आने वाली बदबू कम हो जाती है

.एक टब गर्म पानी में ५० मिलीलीटर सिरका डालें और अपने पैरों को इस पानी में १०-१५ मिनट के लिए रहने दें।

.जब नहाएं तो उस समय पैरों को केवल पानी से धोएं बल्कि उसे किसी खुरदुरी वस्तु से रगडें ; जिससे पैरों कि त्वचा कि मृत कोशिकाएं टूट टूट कर त्वचा से अलग हो जाए.

.पैरों और अँगुलियों के बीच के भाग को दिन में कम से कम एक बार स्पिरिट से भीगी हुई रुई से साफ़ करें.

. लगातार दो दिनों तक एक ही जोड़ी जूते पहने. अपने लिए कम से कम दो जोड़ी जूते तैयार रखे. एक दिन पहनने के बाद उन जूतों को साफ़ करके उसमें टैल्कम पावडर डालकर या डियोडरेंट डालकर धूप में सूखने के लिए रख दें.

.बंद जूते नहीं पहनें. जहां तक संभव हो खुले मुंह की चप्पल या sandals पहनें. ऐसा करने से पैरों के चारों ओर हवा का फ्लो बना रहता है और ज़्यादा पसीना नहीं बनता है.

.मोज़े धोने से पहले मोजों को उलटा कर लें और उसके बाद साबुन में भिगोएँ. ऐसा करने से मोजों के अंदर पैरों की मृत कोशिकाएं साबुन से धुल कर बह जाती हैं और पैरों की दुर्गन्ध बहुत कम हो जाती है.

.अगर कुछ दिनों के लिए जूते नहीं पहनने हों तो उनके अंदर - लोंग (Clove) डाल दें. ऐसा करने से कुछ ही दिनों में जूतों में से बदबू खत्म हो जायेगी.

.सिर्फ मोजे पहन कर ज़मीन पर चलने की आदत छोड़ दें. मोज़े ज़मीन के सम्पर्क में आने से Bacterias के ज़्यादा संपर्क में जाते हैं और उन लोगों किए पैरों से ज़्यादा बदबू आती है.

१०.आजकल विदेशों में एक और तकनीक गयी है जिसे Iontophoresis कहते हैं. इसमें पैरों में ज़्यादा पसीना आने की समस्या वाले रोगियों को पानी के माध्यम से बहुत हल्का electric current दिया जाता है जिससे पसीना कम निकलता है और बदबू नहीं आती है.

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           “सर्वे भवन्तु सुखिनः सर्वे सन्तु निरामयाः

            सर्वे भद्राणि पश्यन्तु मा कश्चिद्दुःखभाग्भवेत् “        


डॉ.स्वास्तिक

चिकित्सा अधिकारी

(आयुष विभाग, उत्तराखंड शासन)

(निःशुल्क चिकित्सा परामर्श, जन स्वास्थ्य के लिए सुझावों तथा अन्य मुद्दों के लिए लेखक से drswastikjain@hotmail.com पर संपर्क किया जा सकता है )



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